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Big breaking :- नैनीताल हाई कोर्ट ने इस IAS को दी बड़ी राहत , इस मामले में कार्रवाई पर फिलहाल रोक; सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली के मुख्य सचिव को नैनीताल हाई कोर्ट से बड़ी राहत, NGO अधिकारियों के मामले में कार्रवाई पर फिलहाल रोक; सरकार से मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार को एनजीओ के अधिकारियों को फंसाने और धमकाने सहित अन्य मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 मई नियत की है। मुख्य सचिव व उनके अधीनस्थ के विरुद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा की कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के साथ ही डकैती आपराधिक अतिक्रमण व आपराधिक

 

 

 

.हाई कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार को एनजीओ के अधिकारियों को फंसाने और धमकाने सहित अन्य मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इस मामले में निचली कोर्ट के साथ ही प्राथमिकी में आगे की पुलिस कार्रवाई को फिलहाल निलंबित कर दिया है।

 

 

 

साथ ही राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 मई नियत की है। मुख्य सचिव व उनके अधीनस्थ के विरुद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा की कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के साथ ही डकैती, आपराधिक अतिक्रमण व आपराधिक साजिश, जानबूझकर अपमान और धमकी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।न्यायालय के इस आदेश के बाद मुख्य सचिव और अन्य के विरुद्ध अल्मोड़ा में एसटी-एसटी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

 

प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के संयुक्त सचिव विपिन कुमार आर्य के अनुसार दिल्ली में पंजीकृत फाउंडेशन ग्राम डाडाकांडा में धर्मार्थ विद्यालय चला रहा है। फाउंडेशन ने दिल्ली सरकार के अधिकारी राजशेखर निवासी एचआइजी फ्लैट्स मोतिया खान दिल्ली के विरुद्ध केंद्रीय सतर्कता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। उन पर घोटालों के आरोप थे।

पीड़ित से शिकायत वापस लेने को दबाव बनाने का आरोप
आरोप है कि राजशेखर ने दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार के साथ मिलकर पीड़ित से शिकायत वापस लेने को दबाव बनाया। यह भी आरोप है कि शिकायत वापस लेने का दबाव डालने को उन्होंने बीते 14 फरवरी को चार व्यक्तियों को धमकाने के लिए दिल्ली से डाडाकांडा भेजा। शिकायतों से संबंधित साक्ष्य वाले दस्तावेजों, रिकॉर्ड और सबूत वाली पेन ड्राइव लूटकर ले जाने का प्रयास किया।

शिकायत को शीघ्र वापस नहीं लेने पर फाउंडेशन के अधिकारियों को फंसाने की धमकी भी दी। अपने साथ लाए कुछ दस्तावेज और शपथ पत्र में भी हस्ताक्षर करवाने को दबाव बनाया।

आरोप है कि 63 हजार की नकदी भी आरोपित लूट ले गए। इस मामले में अल्मोड़ा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद राजस्व पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध आइपीसी की धारा 392, 447, 120बी, 504 और 506 तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया। यह केस जांच के लिए राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को हस्तांतरित कर जांच आरंभ कर दी गई।

मुख्य सचिव की ओर से याचिका दायर कर हाई कोर्ट में चुनौती
अल्मोड़ा के सीजेएम के आदेश को दिल्ली के मुख्य सचिव की ओर से याचिका दायर कर हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता ने बिना किसी सामग्री के सीआरपीसी की धारा 156 (तीन) के तहत आवेदन दिया है।

,न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद निचली अदालत की कार्रवाई तथा मुकदमे में आगे की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही पक्षकारों को 21 मई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी

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